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7 लाख गुरूकुल को अंग्रेजों ने किया था तबाह, जानें वो साजिश जिससे आई मानसिक गुलामी

26/01/2024
21:01
7 लाख गुरूकुल को अंग्रेजों ने किया था तबाह, जानें वो साजिश जिससे आई मानसिक गुलामी
7 लाख गुरूकुल को अंग्रेजों ने किया था तबाह, जानें वो साजिश जिससे आई मानसिक गुलामी
2024 में भी भारत के लोगों को यह ताना सुनना पड़ता है कि यहां पर लिट्रेसी रेट बेहद कम है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह एक साजिश है। जिसे 200 साल पहले अंग्रेजों ने रची थी। और उसका रिजल्ट यह हुआ कि जो भारत 98 फीसदी लिट्रेट था, वह गुलामी के दौर में सबसे अशिक्षित देश बन गया। असल में अंग्रेजों ने भारत की समृद्ध परंपरा को कुचलने के लिए गुरूकुल सिस्टम को ही तबाह कर दिया। जो कि एक समय भारत की पहचान हुआ करती थी। और इसी सिस्टम से भारत दुनिया के निर्यात में 19 फीसदी हिस्सेदारी रखता था। 1820 के पहले देश में 7 लाख से ज्यादा गुरूकुल थे। यानी हर गांव में एक गुरूकुल। इन्हीं गुरूकुलों के कारण उत्तर भारत में 97 फीसदी लिट्रेसी रेट था और दक्षिण भारत में 100 फीसदी लिट्रेसी रेट था। यानी करीब-करीब हर कोई पढ़ा-लिखा था। तो फिर क्या हुआ..

अंग्रेजों ने कैसे तबाह किए गुरूकुल

इस साजिश को समझने के लिए हमें उस दौर को समझना होगा। महात्मा गांधी के फॉलोअर धर्मपाल ने बिट्रेन जाकर भारत की धरोहरों के बारे में वहां के म्युजियम और दूसरे रिसर्च संस्थानों को पढ़कर एक किताब लिखी है, द ब्यूटीफुल ट्री.. इसमें उन्होंने अंग्रेजों की साजिश को विस्तार से समझाया है। इसके अलावा आईआईटी मद्रास के रिसर्च पेपर में महात्म गांधी के उस बयान के बारे में बताया गया है जिसे उन्होंने साल 1931 में राउंड टेबल क्रांफ्रेस के दौरान में ब्रिटेन में कहा था, कि कैसे अंग्रेजों ने भारत के शिक्षा के सुंदर पेड़ को तबाह कर दिया। आईआईटी के ही रिसर्च पेपर में बताया गया है मैकाले और उनकी टीम ने किस तरह गुरूकुल सिस्टम को तबाह किया। उसके अनुसार अंग्रेजों से पहले भारत के 35-50 फीसदी ऐसे गांव हुआ करते थे, जिन्हें कोई टैक्स नहीं चुकाना पड़ता था। ऐसे में गांव की कमाई गांव के ही काम आती थी। उससे फ्री में शिक्षा उपलब्ध थी और सभी लोग शिक्षा लेते थे। लेकिन अंग्रेजो की लालची निगाहों ने सब तबाह कर दिया। उसने 95 फीसदी गांवों से टैक्स वसूलना शुरू कर दिया। ऐसे में गुरूकुल के लिए धन की कमी होने लगी।

संस्कृत को बना गिया गैर कानूनी

इसके अलावा अंग्रेजों ने गुरूकुल को तबाह करने के लिए यह नियम बना दिया जो गुरूकुल पक्की बिल्डिंग में नहीं है, वह अवैध होंगे और उनकी मदद करना गैर कानूनी होगा। संस्कृत भाषा में पढ़ाई भी गैर कानूनी कर दी गई। इससे गुरूकुल की रीढ़ ही टूट गई। रही-सही कसर अंग्रेजों को अत्याचार ने पूरी कर दी। कई शिक्षकों को मार दिया गया और गुरूकुल को आग लगा दी गई। और फिर मैकाले ने सत्ता के दम पर वह एजुकेश सिस्टम लागू कर दिया, जिससे भारत में अंग्रेजी बाबू पैदा होने लगे और वह अपने ही सभ्यता को छोटा समझने लगे। जिसका परिणाम यह हुआ कि भारतीयों में अंग्रेजों की मानसिकता वाली पीढ़ी तैयार हो गई। जिससे आज भी हम निकलने के लिए जूझ रहे हैं।

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